Sunday, October 16, 2011

सजना के लिए सजना : करवा चौथ

भैयादूज,रक्षाबंधन पर्व की तरह मैं अभी करबाचौथ पर्व को दिल दिमाग से स्वीकार नहीं कर पा रहा हूँ.ये पर्व हमेँ पुरुष प्रधान समाज की देन नजर आ रहे हैँ.मैने सनातन धर्म के सम्बंध मेँ अपनी एक सोंच बना रखी है जो कि आज के पंथों को स्वीकार करने वालों से हट कर है.मानव सत्ता मेँ नरनारी का सम सह अस्तित्व है.दोनो के बीच समसंतुलन आवश्यक है.मानवसत्ता की उत्पत्ति से पूर्व आदम या शंकर से हब्बा या पार्वती का जन्म हम मान सकते हैं और यहां तक पुरुष को महत्वपूर्ण मान सकते हैं लेकिन इसके आगे मानवसत्ता के उदय के बाद मानवसत्ता मेँ कम से कम नरनारी के समसह अस्तित्व को स्वीकार करना ही चाहिए.फिर समाज में सुप्रबंधन व सत के स्थापन के लिए नारीशक्ति को मातृशक्ति मान कर ही हम मानवसत्ता को संस्कार के उच्च शिखर पर पहुंचा सकते हैँ.गौरबशाली भारत मेँ तो नारी को सम्मान स्थान देते हुए सिर्फ सन्तानोत्पत्ति के लिए ही काम का प्रयोग किया जाता था.श्रीअर्द्धनारीश्वरशक्ति पीठ ,बरेली,उप्र संस्थापक श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह 'भैया जी' का कहना है नारी को यदि पुरुष का सम्मान करना है तो वह अपना भाव व मनस निष्काम सेवा मेँ लगाये....

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मेरें Nokia फ़ोन से भेजा गया

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