Thursday, November 3, 2011

भारत की आधी आबादी गरीब !

भारत की औसतन करीब आधी आबादी (41.6फीसदी)गरीबी रेखा से नीचे हैं . यह रोज एक डालर से भी कम कमाई पर गुजारा करती है .संयुक्त राष्ट्र संघ की ताजा रिपोर्ट मेँ यह दावा किया गया है .रिपोर्ट के मुताबिक भारत का मानव विकास सूचकांक भी नीचे की तरफ आया है.


मेरी नजर मेँ इस गरीब आबादी मेँ मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है जो कि बच्चों को भगवान की देन मानते हैं लेकिन गरीबी दूर करने के लिए सरकार से उम्मीद रखते हैं यहां तक कि आरक्षण की भी मांग रखते हैं.जो परिवार नियोजन पर गौर नहीं रखते जो सरकारी कानून पर गौर नहीँ रखते वे सरकार से उम्मीद क्यों रखते.

मेरा विचार है कि सरकारी मदद .आरक्षण ,नौकरी ,आदि उन्हें ही मिलनी चाहिए जो सरकारी कानूनों का उल्लंघन न करे .देश के संविधान का न मानने वालों को देशद्रोही घोषित किया जाए . नियुक्तियों व विभिन्न परिस्थितियों मेँ नारको परीक्षण व ब्रेन मेपिंग अनिवार्य किया जाए.

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Friday, October 21, 2011

आज के महात्मा अन्ना : राजीव शंकर शर्मा,स्टेशन रोड ,तिलहर (शाहजहांपुर ) उप्र

कांग्रेस पार्टी अन्ना हजारे को महात्मा कहे जाने पर तीव्र आक्रोश व्यक्त कर रही है किन्तु कांग्रेस का आक्रोश राष्ट्र का जनमानस की समझ से परे है .राष्ट्र का जनमानस कांग्रेसी पुरोधाओं से जानना चाहता है कि यदि अन्ना हजारे महात्मा नहीँ है तो क्या कांग्रेस ए राजा ,कनीयोझी, सुरेश कलमाड़ी , शीला दीक्षित सरीखों को महात्मा मानती है. अन्ना हजारे को महात्मा न मानने को लेकर दिया गया कांग्रेस का यह तर्क भी कुतर्क की श्रेणी मेँ ही रखा जा सकता है कि महात्मा राष्ट्र मेँ केवल बापू को ही माना जा सकता है .निश्चित तौर पर राष्ट्रपिता गांधी महात्मा की श्रेणी मेँ आते हैं किन्तु इसका यह भी मतलब नहीं कि गांधी जी से पूर्व या उनके बाद राष्ट्र मेँ किसी अन्य को महात्मा की उपाधि नहीं दी जा सकेगी.स्वामी विवेकानन्द ,रामकृष्ण परमहंस , महर्षि दयानन्द , पं.मदनमोहन मालवीय,बाल गंगाधर तिलक ,लाला लाजपत राय व नेता जी सुभाष चंद्र बोस को भी महात्मा की ही श्रेणी मेँ रखा जाएगा.

20.10.2011,वृहस्पतिवार
पाठकनामा,दैनिक जागरण. बरेली ,उप्र


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Wednesday, October 19, 2011

शाकाहारी बिना भजन अधूरा:करुणाकांत मिश्रा

बरेली मण्डल मेँ इस वक्त गांव गांव व नगर नगर जयगुरुदेव के भक्त 'शाकाहारी बनो' आन्दोलन मेँ लगे हुए हैँ.मानव शरीर बड़े यत्नों से प्राप्त होता है.दुनियादारी के काम मेँ भी लगकर मनुष्य प्रभु भक्ति मेँ रम सकता है.यही उसे पशु पक्षी की श्रेणी से अलग करता है. मानव के कर्म के अनुसार ही उसे अगला जन्म मिलता है.झूठ बोलने हिंसा करने और मांस खाने व शराब पीने से समाज दूषित हो रहा है.


संदेशवाहक करुणाकांत मिश्र सत्राह अक्टूबर को जीआईसी के खेल मैदान मेँ भक्तोँ को संबोधित कर रहे थे.जीआईसी ग्राउंड मेँ जयगुरुदेव के भक्त सुबह से ही उमड़ने शुरु हो गे थे.धीरे धीरे कर मैदान के अंदर व बाहर जयगुरुदेव के अनुयायियों का तांता लग गया था.संदेशवाहक करुणाकांत मिश्र ने लोगों से ईमानदारी से कमाने पर जोर दिया.साथ ही कहा कि नेक नियत से काम करने मेँ ही बरकत है.बाबा जयगुरुदेव की अपील है कि सब शाकाहारी होँ.शाकाहारी होने का मतलब सिर्फ मांस मछली शराब आदि छोंड़ने मात्र से नहीं है साथ साथ उदारता,नम्रता,सेवा भाव भी आवश्यक है.निरन्तर मन मेँ भजन चलते रहना आवश्यक है.मन मेँ संसार रखना भक्तों का काम नहीं है.न दुख मेँ रहना भजन करँ

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Sunday, October 16, 2011

सजना के लिए सजना : करवा चौथ

भैयादूज,रक्षाबंधन पर्व की तरह मैं अभी करबाचौथ पर्व को दिल दिमाग से स्वीकार नहीं कर पा रहा हूँ.ये पर्व हमेँ पुरुष प्रधान समाज की देन नजर आ रहे हैँ.मैने सनातन धर्म के सम्बंध मेँ अपनी एक सोंच बना रखी है जो कि आज के पंथों को स्वीकार करने वालों से हट कर है.मानव सत्ता मेँ नरनारी का सम सह अस्तित्व है.दोनो के बीच समसंतुलन आवश्यक है.मानवसत्ता की उत्पत्ति से पूर्व आदम या शंकर से हब्बा या पार्वती का जन्म हम मान सकते हैं और यहां तक पुरुष को महत्वपूर्ण मान सकते हैं लेकिन इसके आगे मानवसत्ता के उदय के बाद मानवसत्ता मेँ कम से कम नरनारी के समसह अस्तित्व को स्वीकार करना ही चाहिए.फिर समाज में सुप्रबंधन व सत के स्थापन के लिए नारीशक्ति को मातृशक्ति मान कर ही हम मानवसत्ता को संस्कार के उच्च शिखर पर पहुंचा सकते हैँ.गौरबशाली भारत मेँ तो नारी को सम्मान स्थान देते हुए सिर्फ सन्तानोत्पत्ति के लिए ही काम का प्रयोग किया जाता था.श्रीअर्द्धनारीश्वरशक्ति पीठ ,बरेली,उप्र संस्थापक श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह 'भैया जी' का कहना है नारी को यदि पुरुष का सम्मान करना है तो वह अपना भाव व मनस निष्काम सेवा मेँ लगाये....

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Friday, September 16, 2011

श्रुति कीर्ति:कुछ तश्वीरेँ

ये सब प्रकृति है.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: "go@blogger.com" <go@blogger.com>
Date: शनिवार, 17 सितंबर, 2011 4:07:28 पूर्वाह्न GMT+0000
Subject: श्रुति कीर्ति:कुछ तश्वीरेँ

श्रुतिकीर्ति इस धरती पर दिन शुक्रवार 18 जून सन 2010ई0को इस धरती पर आयी.जन्मस्थान-बीसलपुर, जिला पीलीभीत,उप्र.पैत्रक भूमि-श्यामाचरन वर्मा आवास,ग्राम ददिउरी,थाना बण्डा,जिला शाहजहांपुर,उप्र.

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Wednesday, September 14, 2011

उप्र मेँ विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया से विषमताएं!

उत्तर प्रदेश मेँ बेसिक टीचर हेतु सन 2001 ई0 से विशिष्ट चयन प्रक्रिया जारी है.जिले स्तर की डयूटी हेतु नियुक्त इन टीचर्स के लिए इस चयन प्रक्रिया से जिले स्तर पर अनेक विषंगतियां देखने को मिलती हैं. पिछली चयन प्रक्रियाओं से जिले बाहर के निवासी अध्यापक नियुक्त होने के कारण जिले मेँ अनेक समस्याएं बनी हुई हैँ.या फिर इस सर्विस को प्रदेश स्तर पर और नियुक्त प्रदेश स्तर की मेरिट के आधार पर हो.अन्यथा सभी अभ्यार्थियों को सिर्फ अपने अपने गृहजनपद मेँ ही आवेदन करने की अनुमति हो.

अब जो विशिष्ट बीटीसी चयन प्रक्रिया प्रारम्भ होने वाली है, उसमेँ बताते है कि प्रत्येक अभ्यार्थी तीन जिलों मेँ आवेदन कर सकेगा,आखिर ऐसा क्यों?अपने अपने गृहजनपद मेँ क्यों नहीँ या फिर प्रदेश स्तर पर एक आवेदन क्यों नहीँ?

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काले हिरन के प्रति ग्रामीणों का उत्साह!

इठलाती इतराती दोहा नदी को शाहजहांपुर मेँ गर्रा नदी के नाम से पुकारते हैँ.इस नदी के तराई मेँ इस समय सैकड़ों काले हिरनों के प्रति लोगों मेँ उत्साह बना हुआ है.


खुदागंज क्षेत्र मेँ ग्राम सथरापुर बहेड़ पुन्ना पुर खेड़ा मझखेड़ा एवं इसी से मिले जनपद पीलीभीत की सीमा के ग्राम खाड़ेंपुर आदि ग्रामों की सीमाओं से गुजरने वाली गर्रा नदी की तराई मेँ इस समय सैकड़ों काले हिरनों का झुण्ड कई माह से कुलाचेँ भरते हुये कोलाहल करके ग्रामीणों के कौतुहल का साधन बनेँ हुए हैँ.


वहीं चर्चा यह भी है कि गर्रा की इस तराई मेँ भारी खड़ी पतेल का सहारा लेते हुए दूर दूर के शिकारी आकर यहां काले हिरनों का शिकार भी कर रहे है जिसे लेकर कभी कभार ग्रामीणों व शिकारियों मेँ लाठी डण्ठे लेकर मारपीट की स्थिति की नौबत भी आ जाती है.वहीँ जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा वन विभाग के लोगों को काले हिरनों के बारे मेँ उनके संरक्षण व शिकारियों पर रोक लगाये जाने के सम्बंध मेँ बार बार शिकायत करने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है. वहीँ लोगों का कहना है कि पूरी नदी की तलहटी मेँ शाम के समय मनहारी दृश्य बन जाता है..

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Thursday, September 1, 2011

शिक्षक दिवस : आज के शिक्षक अन्ना हजारे!

आज का शिक्षक मैं अन्ना हजारे को मानता हूँ.

हम अपना सामाजिक व समुहयुक्त जीवन कैसे जिएं ?इसका संदेश अन्ना का जीवन देता है.जो सोंचते हैं कि लोग मेरे सहयोग मेँ कोई आगे नहीं आता व समाज में सब स्वार्थी होते हैँ.वे अपने मन को शान्त कर जरा अपने बारे मेँ सोँचें कि हमने कब किसी की निस्वार्थ भाव से मदद करनी चाही है ?हममेँ क्या दूसरों के प्रति परोपकार की भावना रही है.?

अन्ना के जीवन से सिद्ध होता है कि दूसरों के लिए त्याग व समर्पण करने वाले कभी अकेले व तन्हा नहीं होते.

जीवन मेँ कुछ पाना है तो नैतिकता ,चरित्र ,,समर्पण,ज्ञान,दया,परोपकार, ,मधुरता, उत्साह,साहस, आदि को स्वीकारना आवश्यक है.


हम युवक चाहें तो 73 वर्षीय अन्ना हजारे से काफी कुछ सीख सकते हैँ.देखा जाये तो हम ईमानदारी से न ही स्वार्थी हैं न ही परमार्थी. यदि हम अपने व अपने समाज का भला चाहते हैं तो हम अपने आराध्य को निरन्तर स्मरण मेँ रखते हुए अपने कैरियर के लिए परिश्रम करते हुए अन्ना हजारे के विचारों पर चलने का प्रयत्न करें.समाज के बीच द्वेष जाति भावना से ऊपर उठ देश की एकता व अखण्डता के लिए जीना सीखेँ.

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Monday, August 22, 2011

अन्ना के सैलाब की कुछ तश्बीरेँ!

वे थे आंसू प्रधानमंत्री की मौत उनके ही रक्षकों द्वारा ही देख


वे आंसू कह रहे थे
कौन है सुरक्षित इस देश मेँ?


आज फिर आंसू अन्ना का सैलाब देख कर


बचपन से सहते खामोशी चुपचाप
आज निकले आंसू बन कर..

सज रहे हैं प्रजातन्त्र के मेले,
जहां अरमान रावण को नहीं रावणत्व को मारने के.

सत्ता परिवर्तन के नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के मेले


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Sunday, August 21, 2011

सपा सुप्रीमो का जन लोकपाल पर बयान

सपा कार्यकर्ता भी अन्ना आन्दोलन के समर्थन मेँ सड़कों पर आ गये हैँ.शाहजहांपुर सपा सांसद मिथलेश कुमार लोक जन शक्ति अभियान के बैनर तले चल रहे धरने मेँ शामिल हो भ्रष्टाचार के खिलाफ खूब बोले.


समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन किया है लेकिन वह न तो जन लोकपाल बिल के प्रारुप से सहमत हैं और न ही सरकारी लोकपाल बिल के प्रारुप से.उन्होने कहा कि उनकी पार्टी अपनी राय लोकसभा स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष रखेगी.


देखा जाए तो संविधान से ऊपर कोई नहीं है.प्रधानमंत्री व न्यायपालिका को भी लोकपाल विधेयक के अन्तर आना ही चाहिए.सपा कार्यकर्ता व नेता वास्तव मेँ समाजवादी हैं भी की नहीं? मैं साम्यवादी विचार का पक्षधर रहा हूँ.न दक्षिण न वामपंथी वरन दोनों का समअस्तित्व.पौराणिक कथाओं में इसी समअस्तित्व की परिकल्पना है-श्री अर्द्धनारीश्वर .

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Saturday, August 20, 2011

The Mountbatten Mission

Lord Mountbatten First become well know during the war years.When Lord Wavell resigned he was appointed viceroy and governor Ganeral.Fully briefed by the labor Government before the left he came with instruction from Mr.Attle that power must be transferred before 30june 1948.


He Reached Delhi on 22 March and was sworn in as vice Roy and Governor General of India on the 24th. Immediately after the swearing in a ceremony.He made a short speech,in which he stressed the need for reaching a solution within the nest few months.

Page 198-


Lord Mountbatten wasextremely intelligent and could read in to the minds of all his Indian colleagues.The moment he found Patel amenable to his idea he put out all the charm and pawer of his personality to win over the Sardar.When Sardar Patel was convinced.Lord Mout batten turned his attention to Jawaharlal.With in a month of Lord Mountbatten arrival in Jawaharlal the firm opponent of partition had become,if not a supporter at least acquiescent to the idea.


I have often wondered how Jawahar Lal was won over by Lord Mountbatten.He is man of principal but he is also impulsive and very amenable to personal influences.I think one factor rersponsible for the change was the personality of Ledy Mountbatten.She is not only extremely intelligent but has attractive an friendly temperament.She admired her husbdnd very greatly and in many cases tried to interpret his thought to those who would not at first agree with him.


(M.Ubul kalam azad)
India Wins Freedom

Tuesday, August 16, 2011

अन्ना के समर्थन में लोग सड़कों पर!

अन्ना के समर्थन मेँ लोग सड़कों पर आ गये है.बरेली मण्डल के सभी जिलों व देश के अन्य भागों से समाचार आ रहे हैं कि अन्ना के समर्थन व अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में लोग सड़कों पर आ गये हैँ.जैसे बन रहा है वैसे केन्द्र सरकार के विरोध में लगे हैं.शाहजहांपुर से संकल्प संस्था के संस्थापक डा. अवधेश मणि त्रिपाठी ,ओसवाल कैमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लि. ,कृषि एवं ग्रामीण विकास संस्थान ,समाजसेवी व विचारक अशोक कु वर्मा 'बिन्दु',आदि हस्ताक्षरअभियान,जागरण सम्पर्क,एक दिवसीय उपवास,आदि मेँ लगे हैं.पीलीभीत से भी खबरे मिली है कि काफी लोग अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध मेँ सड़क पर आ गये हैँ.पूरनपुर से संजय सिंह तोमर,शिव शर्मा ,मुरारी श्रीवास्तव,शाहिद हुसैन,आफताब खाँ ,निसार अहमद,आदि सांकेतिक अनशन पर हैँ.बीसलपुर से पंतजलि योग समिति,आर्य समाजी,आदि अन्ना के समर्थन मेँ सड़क पर आ गये.खजुरिया नवीराम(विलसण्डा)से मानवता हिताय सेवा समिति के सदस्यों के द्वाराअन्नाकेपक्ष मेंजागरुकता अभियान चलाया गया.बरेली,बदायूं,रामपुर,आदि जनपदों से भी अन्ना समर्थन में नेताओं के खिलाफ आक्रोश देखा.मानवता हिताय सेवा स. संस्थापक ने पर्चे बटवाये.

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Sunday, August 14, 2011

हूँ,अन्ना अलोकतान्त्रिक...?!

अमेरीकी विदेश मंत्रालय ने अन्ना के अनशन पर ठीक ही बयान दिये है.हम तो यहां तक कहेंगे कि अमेरीकी फौजौ को लोकतान्त्रिक मूल्यों व संवैधानिक समस्याओं के उपचार के लिए भारत आना चाहिए . यहां की नेताशाही व नौकरशाही के वश में नहीँ.यहां की पब्लिक तो मूर्ख है वह तो चोरों व रिश्वतखोरों को बचाने वालों को वोट देकर संसद व विधानसभाओं मेँ नेताओं को पहुंचाती रहेगी.क्योंकि वह स्वयं भ्रष्ट है.नहीं तो वह अपराधियों को क्यों चुने?शायद इसीलिए ये सब लोकतान्त्रिक हैं व अन्ना व बाबा रामदेव जैसे लोग अलोकतान्त्रिक हैं.धन्य, भारत का तन्त्र व भारत की पब्लिक ?

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Sunday, July 10, 2011

खुल गये स्कूल:अब फिर वही!

सत्र 2011-12 ई0 एक जुलाई से प्रारम्भ हो चुका है.अस्सी प्रतिशत विद्यालय शिक्षा के नाम पर ठगी कर रहे हैं .नये सत्र के साथ कोई नया संकल्य नहीँ,किसी तरह के कोई सुधार व सृजनात्मक कार्य का जज्बा नहीँ.बस,वही पुराना ढररा .पिछले सत्रों की तरह.सत्र के अन्त में जरुर अगले सत्र के लिए वादे लेकिन नया सत्र प्रारम्भ होने के साथ फिर वही पुराना सब कुछ.व्यवस्था परिवर्तन के लिए कोई नहीं जज्बा.

विद्यालय सरकारी हों या गैरसरकारी , अस्सी प्रतिशत से ज्यादा विद्यालय आदर्श व मूल्य खो चुके है.वे सिर्फ कागजों पर आदर्श व मूल्यों को जीते हैं.आचरण से सिर्फ वैश्य व शूद्र हैँ.

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Saturday, July 9, 2011

रेखाओं द्वारा कल्पना!

अपने द्वारा तैयार किया गये गये काल्पनिक तश्वीरों को में यहां पर पोस्ट कर रहा हूँ.मेरी अनुमति से इनका कोई भी इस्तेमाल कर सकता है.

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Friday, July 8, 2011

सामाजिक भ्रष्टाचार:सामाजिकता के दंश

उत्तर प्रदेश के बरेली नगर स्थित मो0 दुर्गा नगर के निवासी मास्टर लक्ष्मी नारायण अपनी टिप्पणियाँ दैनिक जागरण के पाठकनामा मेँ प्रकाशित करवाते रहे हैं.मंगलवार.5जुलाई 2068ई को उनकी टिप्पणी प्रकाशित हुई थी-'सामाजिक भ्रष्टाचार.' जिसकी कुछ पंक्तियां निम्न हैं -

" कैसी बिडंबना है कि जो मुफ्तखोरी,मक्कारी,बेईमानी से पैसा कमाये वह बड़ा आदमी .जो खुन पसीना एक करके मेहनत की रोटी ईमानदारी से खाए वह छोटा आदमी.इसे कहते है सामाजिक भ्रष्टाचार."मैं काफी वर्ष पहले से सामाजिकता के स्थान पर इन्सानियत व करुणा की वकालत करता आया हूँ . सार्वभौमिक ज्ञान से हट कर सामाजिकता का बहाने संकीर्णता को जीते रहते हैं .धर्म,अध्यात्म,शिक्षा,आदि तक को भौतिक सुखों के लिए जीते है.संत कबीर तक को कहना पड़ा कि मैं दुनिया में जो देने आया वह कोई लेने ही आता.

समाज में इन्सान की कोई कीमत नहीं है. कीमत उसके धन वैभव की है .

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Thursday, July 7, 2011

वन्देमातरम। राष्ट्रहित में इस ईमेल को अग्रेषित करें

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From: Deshpremi Bharatvanshi <deshpremi.bharat@gmail.com>
To: <akvashokbindu@yahoo.in>
Date: Thursday, July 7, 2011 3:21:54 PM GMT-0400
Subject: वन्देमातरम। राष्ट्रहित में इस ईमेल को अग्रेषित करें

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[1]View it in your browser.
हो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयार
अगर देश के काम ना आए तो जीवन बेकार
एक चुटकुला भेज सकते हैं तो क्या इसे नही ? इस ईमेल को इतना भेजिए कि पूरा
भारत पढ़े
[2]Follow on Twitter [3]Friend of Facebook
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2.
Twitter Account not yet Authorized


3.
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पद्मनाभ स्वामी मन्दिर के खजाने पर वामपंथी-सेकुलर गठजोड़ की काली नीयत का साया

_पिछले 10-15 सालों में लगातार हिन्दू आस्थाओं की खिल्ली उड़ाना, हिन्दू
मन्दिरों की धन-सम्पत्ति हड़पने की कोशिशें करना, हिन्दू सन्तों एवं
धर्माचार्यों को अपमानित एवं तिरस्कारित करने का जो अभियान चलाया जा रहा है,
वह "किसके इशारे" पर हो रहा है यह न तो बताने की जरुरत है और न ही हिन्दू
इतने बेवकूफ़ हैं जो यह समझ न सकें।
[4]आगे पढ़ें_
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[5]सम्पत्ति का हिसाब माँगने का अधिकार सिर्फ़ कांग्रेस को है…(सन्दर्भ :- राजीव
गाँधी फ़ाउण्डेशन)
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इस सम्बन्ध में यह सवाल भी उठता है कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन को तो सरकार से
आर्थिक मदद, जमीन और इमारत मिली है, फ़िर भी उसे सूचना के अधिकार के तहत नहीं
माना जा रहा, जबकि ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर ऐसी कई सहकारी समितियाँ हैं जो
सरकार से फ़ूटी कौड़ी भी नहीं पातीं, फ़िर भी उन्हें RTI के दायरे में रखा गया
है। यहाँ तक कि कुछ पेढ़ियाँ और समितियाँ तो आम जनता से सीधा सम्बन्ध भी नहीं
रखतीं फ़िर भी वे RTI के दायरे में हैं, लेकिन राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन नहीं है।
क्या इसलिये कि यह फ़ाउण्डेशन देश के सबसे "पवित्र परिवार"(???) से सम्बन्धित
है?
[6]आगे पढ़ें
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[7]मनमोहन सिंह ईमानदार है ?
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इससे बड़ा झूठ इस दुनिया में कोई भी नहीं होगा .. असल में सबसे बड़े बेईमान
और भ्रष्ट मनमोहन सिंह ही है .. एक भ्रष्ट प्रधानमंत्री की सरपरस्ती में ही
एक भ्रष्ट व्यवस्था जन्म ले सकती है .
[8]आगे पढ़ें
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[9]राहुल बबुआ की संवेदना का जवाब नहीं !
राहुल बबुआ की संवेदना का जवाब नहीं.बड़े ही जागरूक इन्सान हैं.जिस प्रदेश
में उनकी खुद की सरकार होती है वहां लाख पुलिसिया अत्याचार,अनाचार,बलात्कार
हो जाए वे नहीं फटकते.फटे में पांव वे तभी डालते हैं जब प्रदेश में विपक्षी
दल की सरकार हो.हाँ,वे पीड़ितों-गरीबों पर कृपा करते समय एक और बात का भी
ख्याल रखते हैं कि उक्त प्रदेश में चुनाव नजदीक है या नहीं.चुनाव अगर निकट
होता है तब हो सकता है कि राहुल बबुआ पीड़ितों पर दोबारा भी कृपा करें
अन्यथा एक बार के दौरे से ही बबुआजी की संवेदना तृप्त हो जाती है.
[10]आगे पढ़ें
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चुटकुला

आपके पास कितने किलोमीटर खेती की जमीन है : राहुल गांधी
किसानः जमीन एकड़ों में या बीघा में नापी जाती है।
दूसरे किसान से-
आपकी भैस कितने मीटर दूध देती हैं: राहुल गांधी
किसानः साहब मीटर में नहीं लीटर में नापते है।

राहुलः अच्छा बताओं एक लीटर दूध कितने का बिक जाता है।
किसानः बीस रूपये का।

राहुलः जब दूध इतना सस्ता है तो फिर पेट्रोल क्यों नही बेचते ।

* राहुल बाबा का कहना है मैं जिन्दगी भर (अक्ल से ) पैदल रहूगा ...और पैदल
यात्रा करुगा !! - डिग्गी सिंह लादेन
* ‎"पद्मानाभस्वामी मंदिर' में खजाना मिलने से पूरा संसद भवन पिछले 4 दिनों
से गीला पड़ा है ...........अब तक वहां १०००० लीटर लार टपक चुकी है ...!!!
* ७८ की उम्र मैं १८ घंटे काम करते हैं मनमोहन - टाइम्स ऑफ़ इंडिया. ....
वे भले ८ घंटे काम करें पर ढंग का करें.

सुरेश चिपलूनकर

शास्त्रों में कहा गया है कि जमीन में गड़े धन की रक्षा हेतु पूर्वजों के रूप
में साँप तैनात होते हैं…
ताकि वह धन सिर्फ़ "सुपात्र" के हाथ ही लगे… यह तो सतयुग की बात थी…।
अब चूंकि कलियुग आ गया है तो मामला उल्टा है,
अब "साँप" तहखानों के दरवाजे के बाहर खड़े हैं और धन पर कुंडली जमाने का
इंतजार कर रहे हैं… :) :) - सुरेश चिपलूनकर

_२जी घोटाले का कच्चा चिट्ठा_
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_योग से कैंसर ठीक हुआ_
[12]http://www.youtube.com/watch?v=LWODmpzWc1
Links:
12. http://facebook.us2.list-manage.com/track/click?u=3dcbecebe50f7dc828e8740d5&id=d01f10b33d&e=23edfe6150

_वेद पुराण पढ़ें आनलाइन - मुफ्त_
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[14]forward to a friend
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[15]unsubscribe from this list | [16]update subscription preferences
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वन्देमातरम। राष्ट्रहित में इस ईमेल को अग्रेषित करें

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From: Deshpremi Bharatvanshi <deshpremi.bharat@gmail.com>
To: <akvashokbindu@yahoo.in>
Date: Thursday, July 7, 2011 3:21:54 PM GMT-0400
Subject: वन्देमातरम। राष्ट्रहित में इस ईमेल को अग्रेषित करें

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हो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयार
अगर देश के काम ना आए तो जीवन बेकार
एक चुटकुला भेज सकते हैं तो क्या इसे नही ? इस ईमेल को इतना भेजिए कि पूरा
भारत पढ़े
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2.
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3.
#

पद्मनाभ स्वामी मन्दिर के खजाने पर वामपंथी-सेकुलर गठजोड़ की काली नीयत का साया

_पिछले 10-15 सालों में लगातार हिन्दू आस्थाओं की खिल्ली उड़ाना, हिन्दू
मन्दिरों की धन-सम्पत्ति हड़पने की कोशिशें करना, हिन्दू सन्तों एवं
धर्माचार्यों को अपमानित एवं तिरस्कारित करने का जो अभियान चलाया जा रहा है,
वह "किसके इशारे" पर हो रहा है यह न तो बताने की जरुरत है और न ही हिन्दू
इतने बेवकूफ़ हैं जो यह समझ न सकें।
[4]आगे पढ़ें_
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[5]सम्पत्ति का हिसाब माँगने का अधिकार सिर्फ़ कांग्रेस को है…(सन्दर्भ :- राजीव
गाँधी फ़ाउण्डेशन)
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इस सम्बन्ध में यह सवाल भी उठता है कि राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन को तो सरकार से
आर्थिक मदद, जमीन और इमारत मिली है, फ़िर भी उसे सूचना के अधिकार के तहत नहीं
माना जा रहा, जबकि ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर ऐसी कई सहकारी समितियाँ हैं जो
सरकार से फ़ूटी कौड़ी भी नहीं पातीं, फ़िर भी उन्हें RTI के दायरे में रखा गया
है। यहाँ तक कि कुछ पेढ़ियाँ और समितियाँ तो आम जनता से सीधा सम्बन्ध भी नहीं
रखतीं फ़िर भी वे RTI के दायरे में हैं, लेकिन राजीव गाँधी फ़ाउण्डेशन नहीं है।
क्या इसलिये कि यह फ़ाउण्डेशन देश के सबसे "पवित्र परिवार"(???) से सम्बन्धित
है?
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[7]मनमोहन सिंह ईमानदार है ?
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इससे बड़ा झूठ इस दुनिया में कोई भी नहीं होगा .. असल में सबसे बड़े बेईमान
और भ्रष्ट मनमोहन सिंह ही है .. एक भ्रष्ट प्रधानमंत्री की सरपरस्ती में ही
एक भ्रष्ट व्यवस्था जन्म ले सकती है .
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[9]राहुल बबुआ की संवेदना का जवाब नहीं !
राहुल बबुआ की संवेदना का जवाब नहीं.बड़े ही जागरूक इन्सान हैं.जिस प्रदेश
में उनकी खुद की सरकार होती है वहां लाख पुलिसिया अत्याचार,अनाचार,बलात्कार
हो जाए वे नहीं फटकते.फटे में पांव वे तभी डालते हैं जब प्रदेश में विपक्षी
दल की सरकार हो.हाँ,वे पीड़ितों-गरीबों पर कृपा करते समय एक और बात का भी
ख्याल रखते हैं कि उक्त प्रदेश में चुनाव नजदीक है या नहीं.चुनाव अगर निकट
होता है तब हो सकता है कि राहुल बबुआ पीड़ितों पर दोबारा भी कृपा करें
अन्यथा एक बार के दौरे से ही बबुआजी की संवेदना तृप्त हो जाती है.
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चुटकुला

आपके पास कितने किलोमीटर खेती की जमीन है : राहुल गांधी
किसानः जमीन एकड़ों में या बीघा में नापी जाती है।
दूसरे किसान से-
आपकी भैस कितने मीटर दूध देती हैं: राहुल गांधी
किसानः साहब मीटर में नहीं लीटर में नापते है।

राहुलः अच्छा बताओं एक लीटर दूध कितने का बिक जाता है।
किसानः बीस रूपये का।

राहुलः जब दूध इतना सस्ता है तो फिर पेट्रोल क्यों नही बेचते ।

* राहुल बाबा का कहना है मैं जिन्दगी भर (अक्ल से ) पैदल रहूगा ...और पैदल
यात्रा करुगा !! - डिग्गी सिंह लादेन
* ‎"पद्मानाभस्वामी मंदिर' में खजाना मिलने से पूरा संसद भवन पिछले 4 दिनों
से गीला पड़ा है ...........अब तक वहां १०००० लीटर लार टपक चुकी है ...!!!
* ७८ की उम्र मैं १८ घंटे काम करते हैं मनमोहन - टाइम्स ऑफ़ इंडिया. ....
वे भले ८ घंटे काम करें पर ढंग का करें.

सुरेश चिपलूनकर

शास्त्रों में कहा गया है कि जमीन में गड़े धन की रक्षा हेतु पूर्वजों के रूप
में साँप तैनात होते हैं…
ताकि वह धन सिर्फ़ "सुपात्र" के हाथ ही लगे… यह तो सतयुग की बात थी…।
अब चूंकि कलियुग आ गया है तो मामला उल्टा है,
अब "साँप" तहखानों के दरवाजे के बाहर खड़े हैं और धन पर कुंडली जमाने का
इंतजार कर रहे हैं… :) :) - सुरेश चिपलूनकर

_२जी घोटाले का कच्चा चिट्ठा_
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_योग से कैंसर ठीक हुआ_
[12]http://www.youtube.com/watch?v=LWODmpzWc1
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_वेद पुराण पढ़ें आनलाइन - मुफ्त_
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Saturday, April 30, 2011

भारत का भला गुटनिरपक्ष नीति ही से.

.

मै इससे पूर्व अनेक बार कह चुका हूं कि भविष्य मे चीन व मुस्लिम देश एक मंच पर होंगे .अमेरीका अपनी राईफले भारत के कन्धे पर रख चीन पर निशाना साधने की है.भारत मे ऐसी स्थिति मुस्लिम व्यवहार गृह स्थिति पैदा कर सकते है.हालांकि भारतीय मुसलमान दुनिया के शेष मुसलमानों से हट कर है.गैरमुसलमानों के संग रहते रहते वह गैरमुसलमानों के दर्द को भी समझता है,यदि कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों को छोड़ दें.अगला विश्वयुद्ध एशिया से ही लड़ा जाना है.अमेरीका की फौजें भारत मे अपना ठिकाना बना सकती हैं .युद्ध का क्या परिणाम होता है?इसे कुण्ठित व निष्ठुर व्यक्ति क्या समझे ? एशिया को युद्ध से बचाना चाहते हो,तो एशिया के तमाम देशों की पब्लिक को जागरुक होना होगा.देश देश बीच समस्यायों को आपस मे ही सुलझाना होगा .अमेरीका की नियति ठीक नहीं ,वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी ईमानदारी से नहीं लड़ रहा है.ओशो ने उसे उसकी ही भूमि पर लताड़ा था,ओशो को उसने जहर जरुर दिया लेकिन सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता .मै भी कहता हूँ दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह है अमेरीका.उसका जीवन कब तक है?तृतीय विश्व युद्ध के आखिर में तो भारत ,रुस व चीन का त्रिगुट अवश्य नजर आना चाहिए.भारत को गुटनिरपेक्षता तटस्थता गरीब देशो का पक्ष व शान्ति की बात तब तक करती ही रहना चाहिए ,जब तक युद्ध मजबूरी न हो जाए.उसे आम आदमी के लिए विश्व के तमाम देशों की शरहदे खोल देने की वकालत करनी चाहिए.सार्क देशों की एक सेना एक मुद्रा की बात आगे बढ़ाना चाहिए.इस हेतु सरकारोँ को प्रेरित करने के लिए कम से कम मुस्लिम जनता को सड़क पर आना ही चाहिए.पाकिस्तान, अफगानिस्तान ,कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार ,प.बंगाल, बांग्ला देश काफी तादाद में मुस्लिम आबादी है.जो सड़क पर आ जाये तो यह देश संयुक्त हो ही सकते हैं.भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम की तरह मैं इस मुहिम मे भी समर्थन करने के लिए तैयार हूँ .क्योंकि मेरा एक सपना है -अखण्ड भारत . नेता मुलायम सिंह क्या इस मुहिम को आगे बढ़ाना चाहेंगे ?लोहिया का भी तो सपना था-अखण्ड भारत का.नक्सलियों को भी अपने आन्दोलन को हिंसक बनाते हुए इस काम पर विचार करना चाहिए .

अखण्ड ज्योति : विशिष्ट सामयिक चिन्तन



जब मैं कक्षा पांच का छात्र था,तब से मै निरन्तर अखण्ड पत्रिका पढ़ रहा हूँ.इस पत्रिका का प्रत्येक लेख सराहनीय रहा है.विशिष्ट सामयिक चिंतन मेरे लिए विशेष महत्वपूर्ण रहा है.इस बार के अप्रैल अंक के विशिष्ट सामयिक चिंतन परिशिष्ट का विषय था -'युग परिवर्तन हेतु सात विभूतियों का आह्वान '.



सत्य ही है कि यों सभी मनुष्य ईश्वर के पुत्र हैं,पर जिनमें कुछ विशेष विभूतियाँ दिखाई देती हैं,उन्हें ईश्वर की विशिष्ट संपदा से संपन्न समझा जाना चाहिए.गीता के विभूति योग में भगवान कृष्ण ने विशिष्ट विभुतियों मे अपना अंश होने की बात कही है.भावनात्मक नवनिर्माण जैसे युगांतरकारी अभियान में ऐसी विशिष्ट विभूतियों का विशेष योगदान होता है.विभूतियों को सात भागों में विभक्त किया जा सकता है-भावनाशील वर्ग,शिक्षा एवं साहित्य,कलामंच,विज्ञान,शासन सत्ता ,संपदा के धनी ,प्रतिभाएं . इन सातों के उपयोग सुनियोजन से ही किसी समय विशेष में व्यक्ति और समाज का कल्याण होता है.
......सातों विभूतियों के क्षेत्र मे संसार की करोड़ों प्रतिभाएं आती हैँ.उन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करने का कार्य साधारण नहीं , असाधारण है.



हाँ!इसे पूर्व ,मार्च 2011के अंक का विशिष्ट सामयिक चिंतन व्यवस्थाओं मे परिवर्तन हेतु बड़ा आशावान था .जिसकी आखिरी पंक्तियां थीं-"धरती पर सतयुग आएगा एवं इसका प्रमाण मिल रहा है उषाकाल प्रभातपर्व की इस वेला मे उस अरुणोदय से,जो स्पष्ट दिखाई दे रहा है.किसी को भी इसमे संशय नहीँ जो स्पष्ट दिखाई दे रहा है.किसी को भी इसमे संशय नहीं होना चाहिए.कहीं आप भी असमंजस मे तो नहीं?यह समय बदलने का है.बदल जाइए."



वैचारिक क्रान्ति मे अण्खड ज्योति का योगदान कम नहीं है.वर्तमान युग का जब भी इतिहास लिखा जाएगा तो इसका जिक्र स्वर्णिम वर्णों मे होगा.



दो प्रतिशत से भी कम महापुरुष हुए है ,जिन्होने समाज के लिए निर्देशक का कार्य किया है.सन 2011ई0 प्रारम्भ होने के साथ विश्व मे बदलाव के लिए लोग छटपटाने लगे हैं.इस बीच सत्य सांई बाबा का जाना बड़ी छति का प्रतीक है सम्भवत : .उनको भी इस घड़ी मे रुकना चाहिए था. खबरइंडिया बेवसाइट ने कहा है कि बाबा का निधन हुआ है कि वह ब्रह्म लीन हुए हैं?खैर,दुनिया मे बदलाव की लहर जारी है.भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है . मुस्लिम संतो को भी आगे आना चाहिए .मानव उत्थान हित अब सबको बदलना ही चाहिए.



: भविष्य कथांश:रेडियशन से बचाव !



गरीब तबके के लोग एक परिवार से संघर्ष करके एक गाय को अपने कबीले मे ले आये थे.


बालक फदेस्हरर बोला -" एक गाय के लिए मानव मानव के बीच संघर्ष ? "

"इतनी ही अक्ल होती तो बात ही फिर दूसरी होती.हर सृष्टि के बाद ऋग्वैदिक काल मे आर्य विद्वान एक 'आर्ट आफ लिविंग' देते हैं लेकिन मानव आगे चल कर साम्प्रदायिकता , सत्तावाद व पूंजीवाद की कठपुतली बन कर रह जाता है . 21 मई 2011ई0 के दो माह पूर्व लगभग! दिन गुरुवार 24 मार्च रंगपंचमी पर्व,दोहा नदी के तट पर स्थित एक शहर अंगदीय(शाहजहाँपुर) के समीप स्थित एक कस्बा ईश गढ़ (खुदागंज) मे यह पर्व बड़ी धूम से मनाया जा रहा था.जहां स्थित एक देवि स्थल पर अपने धरती के कुछ व्यक्ति अपने सूक्ष्म शरीर मे उपस्थित थे. इसी धरती के निबासी चर्चा कर रहे थे. "



* * * *

खुदागंज का ही एक देवि स्थल के प्रांगण मे एक पीपल वृक्ष के नीचे-



"आदिकारण श्रीनारायण अर्थात ईश्वरीय तत्व से ही है सब कुछ."


"सब कुछ कैसे ? वर्तमान के प्रलय काल के लिए तो मनुष्य दोषी है ! मनुष्य से क्या प्रकृति प्रभावित नही होती ? "


" प्रकृति ही प्रकृति को प्रभावित करती है .मनुष्य जो करता है वह अपनी ऐच्छिक व शारीरिक आवश्यकताओं वश चेष्टाएं करता है.कर्म तो आत्मा से होते है. "



"रेडियोएक्टिव प्रदूषण से बचने के उपाय तो होंगे ? जापान मे देखो क्या चल रहा है,रेडियशन से क्या उपाय हो सकते हैं गरीब व्यक्ति के सामने ? "



"आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ योग,कलर थेरेपी सुगन्ध थेरेपी प्रकाश थेरेपी आदि,गाय का गोबर मूत्र दूध घी आदि...और आत्मबल."



"गाय के गोबर से लिपी जमीन दीवारों पर रेडियेशन का प्रभाव नहीं पड़ता."


"हमारे पूर्वजों ने कहा था कि गाय के सींगों पर पृथ्वी टिकी है,तो इसका मतलब क्या है? यहां गाय के सींगों से मतलब गाय के सम्मान से है."



"भविष्य में बचे खुचे मनुष्यों के द्वारा गाय का सम्मान एक मजबूरी हो जाता है.गोमूत्र तो मनुष्य के प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का अच्छा उपाय है ही,रेडियेशन आदि के कारण कैंसर होने की संभावना समाप्त करता है."



"इस पर अब तो अनेक वैज्ञानिक शोध भी सामने आये हैं."



"यदि बाल्यावस्था से ही मनुष्य गौमूत्र व उसके दूध से बने उत्पाद के साथ साथ आयुर्वेद आदि को दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो मनुष्य अपनी उम्र व स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से उबरा रह सकता है. "




"गौरबशाली भारत का इतिहास घर घर मे गाय पालन व सम्मान का इतिहास था."



" रुसी वैज्ञानिक सिरोविच ने कहा है कि आण्विक विकरण से रक्षा पर अपने प्रयोग के दौरान पाया कि गाय के घी की अग्नि में आहुति देने पर उसकी जो सुवास निकलती है वह जहाँ जहाँ तक फैलती है उससे सारा वातावरण आण्विक विकरण से मुक्त हो जाता है. "



" शायद हजरत मोहम्मद साहब ने भी कहा है कि गाय का दूध गिजा है,घी दबा है और गोस्त बीमारी है . "



" हमने सुना है कि दिवाकर अपना घर बच्चे छोंड़ मांड् या चला गया है. "



" सही ही सुना है."



"जब बाबा ही बनना था तो शादी क्यों की ?"



"क्या गृहस्थ सन्यासी नहीं हो सकता ? और फिर पहले अपने परिवार को मना कर वह सन्यासी बना.साल मे दो तीन बार घर आता भी रहता है."



"हाँ,बात गोधन की हो रही थी.सर जी के साहित्य से पता चलता है कि जीवों वनस्पतियों की प्रजातियां खत्म हो रही हैं ऐसे में दो तीन हजार वर्ष बाद गोधन को पाने की लालसा मे संघर्ष तेज हो सकते है ."



अब इकसठवीं सदी-



युवती फदेस्हरर व बालक हफ्कदम एक तिब्बती अधेड़ स्त्री के साथ पैदल ही समुद्र तट के विपरीत दिशा में आगे बढ़ते जा रहे थे . मत्स्य मानव की विशालकाय प्रतिमा पीछे ही छूट गयी थी.



दायीं ओर कुछ लोग गाय को लेकर झगड़ रहे थे.जब उन्होने इन तीनो को देखा तो कुछ पल के लिए स्थिर हो गये.
जब तीनों उधर ही बढ़ गये तो वे सब शान्त भाव से इधर ही बढ़ चले.


* * * *




युवती फदेस्हरर व बालक हफ्क्दम तिब्बती अधेड़ स्त्री के साथ मिट्टी से बने एक चौकोर चबूतरे पर बैठे हुए थे . कबीला के लोग सामने जमीन पर बैठे थे .गाय को घेरे कुछ दबंग युवक खड़े थे.
इस गरीब कबीला के कुछ लोग गाय को चुरा कर ले तो आये थे लेकिन फिर यहां गाय के दूध ,मूत्र व गोबर के इस्तेमाल को लेकर आपस मेँ झगड़ पड़े थे.



फदेस्हरर गाय को घेरे दबंग युवकों से बोली-



"आप सब को अब भी सीख नहीं लेनी अपने पुरखों की करतूतों से.मानव शक्ल हो सब ,सनातन महापुरुषों के सम्मान में कुछ तो करो.आपके परिजन सामर्थ्यवान है,बस इतना ही काफी है ? इन गरीबों को आप सब बन्धुआ तो रख सकते हो लेकिन इनके बच्चों के लिए गोरस की व्यवस्था क्यों नहीं? वीर भोग्या बसुन्धरा!यदि यह बिचारे गरीब अपने बच्चों के जीवन के लिए वीरता दिखाते है तो इसके लिए सिर्फ यही दोषी न."

Monday, April 25, 2011

26अप्रैल1920ई0:श्री निवास रामानुजन ( Srinivas Ramanujan ) पुण्य दिवस!



                                                वास्तव मेँ दो प्रतिशत लोगों के कारण ही मनुष्यता की लाज बची है.प्रतिभावानों के जीवन ढंग को उनके जीते जी स्वीकार नहीं किया गया.समाज में तो लकीर के फकीर हुए हैं.भक्ति के दो सहारे होते हैं-ज्ञान व वैराग्य.भक्ति को मैं दूसरा नाम देता हूँ -दीवानगी .



                                                 रामानुजन जब विश्वविद्यालयी शिक्षा प्राप्त न कर सकें.गणित में तो वे पूरे के पूरे नम्बर ले आते थे लेकिन अन्य विषय में वे फेल हो जाते थे.गणित के प्रति उनका लगाव दीवानगी स्तर पर था कि गणित के प्रति तो उनमें ज्ञान व अन्य के प्रति वैराग्य था.ऐसे में उन्हें अपने घर पर बैठना पड़ा.उनके माता पिता ही उन्हें पागल कहने लगे,उपेक्षित करने लगे व कमेंटस तथा नुक्ताचीनी करने लगे.रामानुजन हमेशा संख्याओं से खिलवाड़ करते रहते थे.13 साल की अवस्था में इन्होने लोनी द्वारा रचित विश्व प्रसिद्ध ट्रिगनोमेट्री को हल कर डाला था.15 साल की अवस्था में George Shoobridge Carr द्वारा रचित एक पुस्तक Synopsis of Elementary Results in Pure and Applied Mathematics प्राप्त हुई.इस पुस्तक में छ हजार के लगभग प्रमेयों का संकलन था.जिसके आधार पर इन्होने कुछ नयी प्रमेय विकसित कीँ.
पिता के द्वारा जबरदस्ती विवाह के बाद जीविका यापन व अपने गणित सम्बन्धी कार्य को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी मुश्किल से पच्चीस रुपये माहवार की नौकरी मिल पायी.रुपयों के अभाव में इनकी स्थिति यहां तक पर पहुंच गयी थी कि वे सड़कों पर पड़े कागज उठाने लगे . कभी कभी तो वे अपना काम करने के लिए नीली स्याही से लिखे कागजों पर लाल कलम से लिखते थे.



                                                            इन्होने अपनी 120 प्रमेय को अच्छे कागजों पर लिखकर एक पत्र के साथ कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के विख्यात गणतिज्ञ जी एच हाडी (G.H.HARDY)को भेजी.हार्डी ने तुरन्त ही रामानुजन के कैम्ब्रिज आने के लिए प्रबन्ध कर डाले.इस प्रकार 17मार्च 1914 को रामानुजन ब्रिटेन के लिए जलयान से रवाना होगये थे.फिर सिलसिला शुरु हुआ उनके सम्मान व पुरस्कार का.



                                                             जीवन पर्यन्त उनमें गणित के प्रति दीवानगी बनी रही.आज इस अवसर पर मैं युवक युवतियों से कहना चाहूंगा कि अपनी प्रतिभा के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए.हालातों व सुलभ रास्ता को देख कर या अपने को मजबूर मान कर अपनी क्षमताओं से समझौता ठीक नहीं.आज भारतीय अनुसन्धानशालाओं में अच्छे शोधकर्मियों की कमी है ,इसका एक मात्र कारण युवाओं का नजरिया है.हमारा नजरिया ही हमे स्वतन्त्र या परतन्त्र बनाता है.

भ्रष्टाचार रुपी दानव खत्म कैसे हो?



                                           देश मे काला धन बापस आने से पूर्व भ्रष्ट नेताओं व अफसरों को सजा दिलवाना आवश्यक है.भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम मे अन्ना हजारे व बाबा रामदेव का योगदान सराहनीय रहेगा. लेकिन -पूरा का पूरा तन्त्र भ्रष्ट हो चुका है ऐसे मे नगेटिव थिंकिग ज्यादा व्याप्त है.महाभारत युद्ध मे कृष्ण व पाण्डव के साथ कितने लोग थे ?दुनिया को सिर्फ दो प्रतिशत लोगो ने बदला है.शेष समाज नगेटिव ही रहा है.


                                           जब भ्रष्टाचार रुपी दानव के खिलाफ मुहिम चलानी ही है तो अन्ना व बाबा रामदेव एक मंच पर क्यों नहीं?यह सबाल पब्लिक मे उठ रहे है. जिसका जबाब मे अपने स्तर पर दे रहा हूँ.अन्ना के अनशन के दौरान जो पाजटिव थिंकिंग पैदा होना प्रारम्भ हुई थी वह अब नगेटिव रुप धारण करती जा रही है.अन्ना टीम को इस पर कुछ करना चाहिए.बात है बाबा राम देव की अन्ना से हट कर अपना अभियान चलाने की तो मै इस पर कहना चाहूंगा कि अन्य संस्थाओं को भी अपने स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाना चाहिए लेकिन एक दूसरे के समर्थन मे एक दूसरे के मंच पर आते रहें.एक मंच तले देश की पब्लिक को नहीं लाया जा सकता,इसका कारण पब्लिक का मतभेद मे जीना है.
यदि एक मंच पर आ कर ही यह अभियान चलाया जाए तो फिर बात ही क्या.





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