Monday, August 22, 2011

अन्ना के सैलाब की कुछ तश्बीरेँ!

वे थे आंसू प्रधानमंत्री की मौत उनके ही रक्षकों द्वारा ही देख


वे आंसू कह रहे थे
कौन है सुरक्षित इस देश मेँ?


आज फिर आंसू अन्ना का सैलाब देख कर


बचपन से सहते खामोशी चुपचाप
आज निकले आंसू बन कर..

सज रहे हैं प्रजातन्त्र के मेले,
जहां अरमान रावण को नहीं रावणत्व को मारने के.

सत्ता परिवर्तन के नहीं, व्यवस्था परिवर्तन के मेले


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Sunday, August 21, 2011

सपा सुप्रीमो का जन लोकपाल पर बयान

सपा कार्यकर्ता भी अन्ना आन्दोलन के समर्थन मेँ सड़कों पर आ गये हैँ.शाहजहांपुर सपा सांसद मिथलेश कुमार लोक जन शक्ति अभियान के बैनर तले चल रहे धरने मेँ शामिल हो भ्रष्टाचार के खिलाफ खूब बोले.


समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन किया है लेकिन वह न तो जन लोकपाल बिल के प्रारुप से सहमत हैं और न ही सरकारी लोकपाल बिल के प्रारुप से.उन्होने कहा कि उनकी पार्टी अपनी राय लोकसभा स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष रखेगी.


देखा जाए तो संविधान से ऊपर कोई नहीं है.प्रधानमंत्री व न्यायपालिका को भी लोकपाल विधेयक के अन्तर आना ही चाहिए.सपा कार्यकर्ता व नेता वास्तव मेँ समाजवादी हैं भी की नहीं? मैं साम्यवादी विचार का पक्षधर रहा हूँ.न दक्षिण न वामपंथी वरन दोनों का समअस्तित्व.पौराणिक कथाओं में इसी समअस्तित्व की परिकल्पना है-श्री अर्द्धनारीश्वर .

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Saturday, August 20, 2011

The Mountbatten Mission

Lord Mountbatten First become well know during the war years.When Lord Wavell resigned he was appointed viceroy and governor Ganeral.Fully briefed by the labor Government before the left he came with instruction from Mr.Attle that power must be transferred before 30june 1948.


He Reached Delhi on 22 March and was sworn in as vice Roy and Governor General of India on the 24th. Immediately after the swearing in a ceremony.He made a short speech,in which he stressed the need for reaching a solution within the nest few months.

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Lord Mountbatten wasextremely intelligent and could read in to the minds of all his Indian colleagues.The moment he found Patel amenable to his idea he put out all the charm and pawer of his personality to win over the Sardar.When Sardar Patel was convinced.Lord Mout batten turned his attention to Jawaharlal.With in a month of Lord Mountbatten arrival in Jawaharlal the firm opponent of partition had become,if not a supporter at least acquiescent to the idea.


I have often wondered how Jawahar Lal was won over by Lord Mountbatten.He is man of principal but he is also impulsive and very amenable to personal influences.I think one factor rersponsible for the change was the personality of Ledy Mountbatten.She is not only extremely intelligent but has attractive an friendly temperament.She admired her husbdnd very greatly and in many cases tried to interpret his thought to those who would not at first agree with him.


(M.Ubul kalam azad)
India Wins Freedom

Tuesday, August 16, 2011

अन्ना के समर्थन में लोग सड़कों पर!

अन्ना के समर्थन मेँ लोग सड़कों पर आ गये है.बरेली मण्डल के सभी जिलों व देश के अन्य भागों से समाचार आ रहे हैं कि अन्ना के समर्थन व अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में लोग सड़कों पर आ गये हैँ.जैसे बन रहा है वैसे केन्द्र सरकार के विरोध में लगे हैं.शाहजहांपुर से संकल्प संस्था के संस्थापक डा. अवधेश मणि त्रिपाठी ,ओसवाल कैमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लि. ,कृषि एवं ग्रामीण विकास संस्थान ,समाजसेवी व विचारक अशोक कु वर्मा 'बिन्दु',आदि हस्ताक्षरअभियान,जागरण सम्पर्क,एक दिवसीय उपवास,आदि मेँ लगे हैं.पीलीभीत से भी खबरे मिली है कि काफी लोग अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध मेँ सड़क पर आ गये हैँ.पूरनपुर से संजय सिंह तोमर,शिव शर्मा ,मुरारी श्रीवास्तव,शाहिद हुसैन,आफताब खाँ ,निसार अहमद,आदि सांकेतिक अनशन पर हैँ.बीसलपुर से पंतजलि योग समिति,आर्य समाजी,आदि अन्ना के समर्थन मेँ सड़क पर आ गये.खजुरिया नवीराम(विलसण्डा)से मानवता हिताय सेवा समिति के सदस्यों के द्वाराअन्नाकेपक्ष मेंजागरुकता अभियान चलाया गया.बरेली,बदायूं,रामपुर,आदि जनपदों से भी अन्ना समर्थन में नेताओं के खिलाफ आक्रोश देखा.मानवता हिताय सेवा स. संस्थापक ने पर्चे बटवाये.

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Sunday, August 14, 2011

हूँ,अन्ना अलोकतान्त्रिक...?!

अमेरीकी विदेश मंत्रालय ने अन्ना के अनशन पर ठीक ही बयान दिये है.हम तो यहां तक कहेंगे कि अमेरीकी फौजौ को लोकतान्त्रिक मूल्यों व संवैधानिक समस्याओं के उपचार के लिए भारत आना चाहिए . यहां की नेताशाही व नौकरशाही के वश में नहीँ.यहां की पब्लिक तो मूर्ख है वह तो चोरों व रिश्वतखोरों को बचाने वालों को वोट देकर संसद व विधानसभाओं मेँ नेताओं को पहुंचाती रहेगी.क्योंकि वह स्वयं भ्रष्ट है.नहीं तो वह अपराधियों को क्यों चुने?शायद इसीलिए ये सब लोकतान्त्रिक हैं व अन्ना व बाबा रामदेव जैसे लोग अलोकतान्त्रिक हैं.धन्य, भारत का तन्त्र व भारत की पब्लिक ?

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