Saturday, April 30, 2011

अखण्ड ज्योति : विशिष्ट सामयिक चिन्तन



जब मैं कक्षा पांच का छात्र था,तब से मै निरन्तर अखण्ड पत्रिका पढ़ रहा हूँ.इस पत्रिका का प्रत्येक लेख सराहनीय रहा है.विशिष्ट सामयिक चिंतन मेरे लिए विशेष महत्वपूर्ण रहा है.इस बार के अप्रैल अंक के विशिष्ट सामयिक चिंतन परिशिष्ट का विषय था -'युग परिवर्तन हेतु सात विभूतियों का आह्वान '.



सत्य ही है कि यों सभी मनुष्य ईश्वर के पुत्र हैं,पर जिनमें कुछ विशेष विभूतियाँ दिखाई देती हैं,उन्हें ईश्वर की विशिष्ट संपदा से संपन्न समझा जाना चाहिए.गीता के विभूति योग में भगवान कृष्ण ने विशिष्ट विभुतियों मे अपना अंश होने की बात कही है.भावनात्मक नवनिर्माण जैसे युगांतरकारी अभियान में ऐसी विशिष्ट विभूतियों का विशेष योगदान होता है.विभूतियों को सात भागों में विभक्त किया जा सकता है-भावनाशील वर्ग,शिक्षा एवं साहित्य,कलामंच,विज्ञान,शासन सत्ता ,संपदा के धनी ,प्रतिभाएं . इन सातों के उपयोग सुनियोजन से ही किसी समय विशेष में व्यक्ति और समाज का कल्याण होता है.
......सातों विभूतियों के क्षेत्र मे संसार की करोड़ों प्रतिभाएं आती हैँ.उन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करने का कार्य साधारण नहीं , असाधारण है.



हाँ!इसे पूर्व ,मार्च 2011के अंक का विशिष्ट सामयिक चिंतन व्यवस्थाओं मे परिवर्तन हेतु बड़ा आशावान था .जिसकी आखिरी पंक्तियां थीं-"धरती पर सतयुग आएगा एवं इसका प्रमाण मिल रहा है उषाकाल प्रभातपर्व की इस वेला मे उस अरुणोदय से,जो स्पष्ट दिखाई दे रहा है.किसी को भी इसमे संशय नहीँ जो स्पष्ट दिखाई दे रहा है.किसी को भी इसमे संशय नहीं होना चाहिए.कहीं आप भी असमंजस मे तो नहीं?यह समय बदलने का है.बदल जाइए."



वैचारिक क्रान्ति मे अण्खड ज्योति का योगदान कम नहीं है.वर्तमान युग का जब भी इतिहास लिखा जाएगा तो इसका जिक्र स्वर्णिम वर्णों मे होगा.



दो प्रतिशत से भी कम महापुरुष हुए है ,जिन्होने समाज के लिए निर्देशक का कार्य किया है.सन 2011ई0 प्रारम्भ होने के साथ विश्व मे बदलाव के लिए लोग छटपटाने लगे हैं.इस बीच सत्य सांई बाबा का जाना बड़ी छति का प्रतीक है सम्भवत : .उनको भी इस घड़ी मे रुकना चाहिए था. खबरइंडिया बेवसाइट ने कहा है कि बाबा का निधन हुआ है कि वह ब्रह्म लीन हुए हैं?खैर,दुनिया मे बदलाव की लहर जारी है.भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है . मुस्लिम संतो को भी आगे आना चाहिए .मानव उत्थान हित अब सबको बदलना ही चाहिए.



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